Wednesday, February 6, 2019

ट्विटर पर राहुल का जलवा, बजट को लेकर किया गया ट्वीट बना नंबर 1, मोदी चौथे नंबर पर

लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में तलवारें खिंच चुकी हैं. 2019 का चुनाव सिर्फ रैली में भीड़ या भाषणों में तल्खी के आधार पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी लड़ा जा रहा है. चुनाव से पहले पेश हुए मोदी सरकार के अंतरिम बजट ने ट्विटर पर जमकर सुर्खियां बटोरीं. बजट को लेकर चली इस बहस में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बाजी मारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी, प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर अकाउंट को काफी पीछे छोड़ दिया.

ट्विटर के अनुसार, अंतरिम बजट 2019 को लेकर राजनेताओं या हस्तियों द्वारा जो ट्वीट किए गए उसमें राहुल गांधी का ट्वीट नंबर एक था. किसानों को 6000 रुपये प्रति सालाना वाली स्कीम की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने जो ट्वीट किया, उसे करीब 13000 बार ट्वीट किया गया. जबकि नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया ट्वीट नंबर 4, पीएमओ द्वारा किया गया ट्वीट नंबर 5 पर रहा.

गौरतलब है कि बीते करीब एक साल से राहुल गांधी सोशल मीडिया पर काफी आक्रामक हैं. चाहे वह किसी भी मुद्दे पर ट्वीट करना हो, तुकबंदी के साथ मोदी सरकार को आड़े हाथ लेना हो या फिर बीजेपी पर निशाना साधने वाले मीम को शेयर करना हो, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर फ्रंटफुट पर बैटिंग की है.

इस श्रेणी में दूसरा नंबर भारतीय जनता पार्टी के हाथ लगा. राहुल के ट्वीट का जवाब देने के लिए बीजेपी ने जो ट्वीट किया, उसे करीब 9000 बार रिट्वीट किया गया. तीसरे नंबर पर एक पत्रकार का ट्वीट रहा जिसमें उन्होंने राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी के मास्टरस्ट्रोक की बात की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बजट को लेकर किया गया ट्वीट चौथे नंबर पर रहा, उनके ट्वीट को 7500 बार रिट्वीट किया गया. पांचवें नबर पर पीएमओ का ट्वीट रहा, जिसमें मिडिल क्लास को मिली टैक्स में छूट की बात कही गई. इसे करीब 4700 बार रिट्वीट किया गया.

इसके अलावा बजट को लेकर जो ट्वीट किए गए, उनमें पुडुचेरी की गवर्नर किरण बेदी, आजतक की एक्जीक्यूटिव एडिटर श्वेता सिंह समेत अन्य हस्तियों के ट्वीट टॉप 10 में शामिल हैं.

अंतरिम बजट को लेकर 31 जनवरी से लेकर 3 फरवरी तक लगातार ट्वीट किए गए. इनकी कुल संख्या 1.4 लाख मिलियन हैं, जिसमें से कुल 8 लाख ट्वीट भारतत से ही किए गए थे. बजट वाले दिन ही करीब 72000 ट्वीट प्रति घंटा की रफ्तार से ट्वीट हुए.

Monday, February 4, 2019

घर में बचीं अनुपयोगी दवाएं फेंकें नहीं, इन नंबर पर करें फोन, पहुंचाई जाएंगी जरुरतमंदो तक

अगर आप अपने या परिजनों के इलाज के लिए दवाएं लाते हैं और वे बच जाती हैं, तो उन्हें न तो घर में बेकार पड़ी रहने दें और न ही फेंकें। आपके लिए अनुपयोगी ये दवाएं जरूरतमंदों के काम आ सकती हैं। शहर के युवाओं व कुछ समाजसेवियों के एक ग्रुप ने अनूठी पहल करते हुए दवा बैंक खोला है। यह ग्रुप डेढ़ साल से अनुपयोगी एलोपैथिक दवाओं के संग्रहण का कार्य कर रहा है। इन्होंने दवा एकत्र करने के लिए भोपाल व मंडीदीप में कई दुकानों व संस्थानों में बाॅक्स रखे हैं, जिनमें लोग दवाएं डालकर जाते हैं। इन दवाओं का ये झुग्गी बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप लगाकर डॉक्टर्स के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क वितरण करते हैं।

ग्रुप के प्रमुख कौशल अग्रवाल ने बताया कि अक्सर लोग घर में बची दवाओं के प्रति लापरवाह होते हैं। स्वस्थ हो जाने के बाद वे भूल जाते हैं कि कई महंगी दवाएं धूल खा रही हैं। तय समय के बाद वे एक्सपायर हो जाती हैं तो उन्हें फेंक देते हैं। ये अनुपयोगी दवाएं अगर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के काम आ जाएं तो कितना अच्छा हो। यह विचार आते ही उन्होंने दवा बैंक खोलने का निर्णय लिया।

- ग्रुप के मेंबर व अरेरा कॉलोनी अग्रवाल समाज के पदाधिकारी प्रतीक अग्रवाल ने बताया कि कांच के बॉक्स बनवाकर उन्हें गुलमोहर स्थित अपने व्यवसायिक संस्थान समेत टीटी नगर, एमपी नगर, दस नंबर, होशंगाबाद रोड, मिसरोद व मंडीदीप आदि स्थानों की दुकानों व संस्थानों पर रखवाए गए हैं, जहां लोग उनके लिए अनुपयोगी हो चुकीं दवाओं को इनमें डालकर जाते हैं। एकत्र होने वाली जीवनोपयोगी दवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

खरीदकर भी देते हैं दवाएं : बैंक में जो दवाएं उपलब्ध नहीं होती हैं, उन्हें समाजसेवी गोपाल अग्रवाल समेत अन्य लोग खरीदकर देते हैं। इस ग्रुप में सेवा कार्य कर रहे लोगों में नेहा अग्रवाल, दीपक अनेजा, प्रत्येंद्र मिश्रा, सौरभ जैन, सुमित रघुवंशी, कमलकांत अग्रवाल, सतीश डडेजा व मनीष कथौलिया आदि शामिल हैं।

कैंप लगाकर बांटते हैं दवाएं : एक प्राइवेट संस्थान में कार्यरत कौशल ने बताया कि इस कल्पना को साकार रूप देने के लिए पांच-छह लोगों ने एक ग्रुप बनाकर घर-घर जाकर लोगों से बेकार दवाएं एकत्र करना शुरू किया। दवाएं इतनी एकत्र होने लगीं कि इनका बैंक बन गया। इन युवाओं ने दवा बैंक के नाम से संस्था की शुरुआत कर भोपाल व मंडीदीप में 20 स्थानों पर एलोपैथिक मेडिसिन कलेक्शन सेंटर बना दिए। विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार हुआ तो लोग यहां दवाएं देने आने लगे। ग्रुप अब तक 25 कैंप लगाकर डॉक्टरों के माध्यम से जरूरतमंदों को दवाएं वितरित कर चुका है। उन्होंने बताया कि कैंप में डॉ. कीर्ति विश्वकर्मा, डॉ. विनोद अहिरवार और डॉ.. मनोज साहू नि:शुल्क सेवाएं देते हैं।

肺炎疫情:纽约一位救护员“职业生涯中最艰难的一天”

安东尼·阿尔莫杰拉(Anthony Almojera)是美国纽约的一名资深急救员。 伴随武汉解封, 色情性&肛交集合 中国的新冠肺炎疫 色情性&肛交集合 情似乎正在告 色情性&肛交集合 一段落,人们的 色情性&肛交集合 生活逐渐恢复正常。 色情性&肛交集合 但一本关于 色情性&...