यमन में मार्च 2015 से युद्ध जैसे हालात हैं। वहां हुती विद्रोहियों और सरकार के बीच संघर्ष जारी है। इस लड़ाई में सऊदी अरब हुती विद्रोहियों के साथ है। वह पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह की वापसी के लिए हुती विद्रोहियों के समर्थन में यमन पर हवाई हमले कर रहा है। इन हमलों और हुती-सरकार के बीच संघर्ष में अब तक 10700 लोगों की जानें जा चुकी हैं। इनमें 2200 बच्चे भी शामिल हैं। इसमें जो बचे भी हैं, उनमें से कई अपना पूरा परिवार युद्ध में गंवा चुके हैं। युद्ध की त्रासदी झेलने वालों में सात साल की बुथानिया मंसूर अल रिमी भी शामिल है, जिसने मिसाइल हमले में परिवार को खो दिया।
बुथानिया सऊदी अरब की अगुआई में हुए हवाई हमलों में अपने माता-पिता, चार बहनों, एक भाई और एक चाचा को खो चुकी है। इस हमले में वह भी घायल हुई थी। पिछले साल सोशल मीडिया पर उसकी एक तस्वीर वायरल हुई थी। इसमें वह बुरी तरह चोटिल दिख रही थी। उसके एक चाचा उसे इलाज के लिए सऊदी अरब ले गए थे। जहां इलाज कराने के बाद अब वह यमन लौट आई है।
डॉक्टर बनना चाहती है बुथानिया
बुथानिया ने कहा, "मैं पहली बार स्कूल जाने की सोच रही हूं। मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि मानवता और यमन के बच्चों के लिए युद्ध खत्म कर दिया जाए।" उसके अंकल अली ने कहा, "वह उस हमले को भूल नहीं पाई है। जब वह अपने परिजन से संबंधित सामन और पिता के पसंदीदा गाने को सुनती है तो दुखी हो जाती है।"
घर पर गिरे थे लगातार तीन मिसाइल
हालांकि, जिस हवाई हमले में उसने अपना पूरा परिवार खोया, उसको याद कर वह अब भी सिहर जाती है। बुथानिया ने न्यूज एजेंसी को बताया, "मैं अपने पिता, बहनों, भाई और चाचा के साथ अपनी मां के कमरे में थी। जब पहली मिसाइल गिरी तो पापा हमारा ध्यान भटकाने के लिए चीनी ले आए, लेकिन हमले होते रहे। दूसरी, फिर तीसरी मिसाइल गिरी। आखिरकार हमारा घर ढह गया।
बुथानिया ने कहा, "वह 25 अगस्त 2017 की रात थी। उसमें मेरे अंकल की भी मौत हुई। वे मुझे सबसे ज्यादा पसंद थे।" उस हमले में बुथानिया के परिजन के अलावा आठ अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। इसमें दो बच्चे भी थे। सऊदी अरब ने इसे "तकनीकी गलती" बताते हुए हवाई हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी निंदा की गई।
हुती विद्रोहियों का कहना है कि बुथानिया की तस्वीर वायरल होने के बाद उसे परिजन के साथ किडनैप कर लिया गया था। रियाद जाने से पहले इन सबको सरकार के सामने ले जाया गया। सऊदी मीडिया के मुताबिक, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के अनुरोध पर सऊदी अरब की राजधानी ले जाया गया।
हुती विद्रोही देंगे घर और वेतन
हुती के अल-मसीरा मीडिया आउटलेट ने बुथानिया के स्वागत में एक कहानी छापा। इसका शीर्षक "सऊदी अरब का चंगुल" दिया। एक शीर्षक में लिखा था, "मानवता की आंख दुश्मन को उजागर करती है।" विद्रोहियों के मुखिया महदी अल-मश्त ने बुथानिया और उसके संबंधियों के लिए घर और वेतन की घोषणा की है।
Monday, December 31, 2018
Monday, December 17, 2018
नवादा रेप केस: RJD से निलंबित MLA राजबल्लभ यादव समेत 6 दोषी, 21 दिसंबर को सजा का ऐलान
बिहार के नवादा में नाबालिग लड़की से रेप किये जाने के मामले में शनिवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से निलंबित विधायक राजबल्लभ यादव समेत 5 अन्य आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया है. साथ ही सजा के फैसले की सुनवाई के लिए 21 दिसंबर की तारीख तय कर दी गई है.
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, बीते 4 दिसंबर को हुई सुनवाई के बाद विशेष जज परशुराम सिंह यादव ने आरोपपत्र पर दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में दोनों पक्षों से करीब 4 महीने तक गवाही चली. इस पर निर्णय के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की गई थी.
पुलिस ने इस मामले में 20 अप्रैल, 2016 को आरोपपत्र दायर किया था. उसके बाद अदालत ने 22 अप्रैल, 2016 को संज्ञान लिया था. इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ 6 सितंबर, 2016 को आरोप गठित किये गये थे. 15 सितंबर, 2016 को बिहारशरीफ कोर्ट में इस मामले में गवाही शुरू हुई थी और बहस भी पूरी हो गयी थी. लेकिन, अंतत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं एमपी-एमएलए कोर्ट के गठन के बाद इस मामले से संबंधित सारे रिकॉर्ड ट्रायल के लिए पटना के विशेष कोर्ट में भेजे गए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानत याचिका
रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद ही 9 नवंबर 2016 को बिहार के नालंदा जिले में राज बल्लभ यादव ने आत्मसमर्पण कर दिया था. इस मामले में 30 सितंबर 2016 को पटना हाई कोर्ट ने आरजेडी विधायक को जमानत दे दी थी लेकिन बाद में 8 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए बेल खारिज कर दी थी.
इस कांड में राजबल्लभ समेत संदीप कुमार उर्फ पुष्पंजय कुमार, राधा देवी, राधा देवी की पुत्री सुलेखा देवी, छोटी उर्फ अर्पिता एवं टिशू कुमार भी शामिल हैं.
क्या थी घटना
गौरतलब है कि नालंदा जिले के रहुई थाने के सुल्तानपुर की 15 वर्षीय नाबालिग लड़की ने नालंदा के महिला थाने में 9 फरवरी को रेप की शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि छह फरवरी को बिहारशरीफ के धनेश्वर घाट मोहल्ले की सुलेखा देवी उसे एक जन्मदिन की पार्टी में ले जाने के बहाने गिरियक ले गईं.
मुंह बंद रखने की धमकी
आरोप है कि सुलेखा ने नाबालिग को नवादा के विधायक राजबल्लभ के हवाले कर दिया. विधायक ने उसके साथ रेप किया. लड़की को सात फरवरी को बिहारशरीफ में उसके घर छोड़ दिया गया और उसे मुंह बंद रखने की धमकी दी गई. थाने में मामला दर्ज होने के बाद से विधायक राजबल्लभ यादव फरार हो गए थे. एक महीने के बाद सरेंडर किया था.
सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था
इस मामले में 30 सितंबर को पटना उच्च न्यायालय ने राजबल्लभ को जमानत दी थी. इसके बाद विधायक की जमानत रद्द करने के लिए बिहार सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. मामला दर्ज होने के बाद राजद ने नवादा क्षेत्र से विधायक राजबल्लभ को पार्टी से निलंबित कर दिया था. फिलहाल इस मामले में वे जेल में बंद थे.
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, बीते 4 दिसंबर को हुई सुनवाई के बाद विशेष जज परशुराम सिंह यादव ने आरोपपत्र पर दोनों पक्षों की बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस मामले में दोनों पक्षों से करीब 4 महीने तक गवाही चली. इस पर निर्णय के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की गई थी.
पुलिस ने इस मामले में 20 अप्रैल, 2016 को आरोपपत्र दायर किया था. उसके बाद अदालत ने 22 अप्रैल, 2016 को संज्ञान लिया था. इसके बाद कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ 6 सितंबर, 2016 को आरोप गठित किये गये थे. 15 सितंबर, 2016 को बिहारशरीफ कोर्ट में इस मामले में गवाही शुरू हुई थी और बहस भी पूरी हो गयी थी. लेकिन, अंतत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं एमपी-एमएलए कोर्ट के गठन के बाद इस मामले से संबंधित सारे रिकॉर्ड ट्रायल के लिए पटना के विशेष कोर्ट में भेजे गए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानत याचिका
रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद ही 9 नवंबर 2016 को बिहार के नालंदा जिले में राज बल्लभ यादव ने आत्मसमर्पण कर दिया था. इस मामले में 30 सितंबर 2016 को पटना हाई कोर्ट ने आरजेडी विधायक को जमानत दे दी थी लेकिन बाद में 8 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संज्ञान लेते हुए बेल खारिज कर दी थी.
इस कांड में राजबल्लभ समेत संदीप कुमार उर्फ पुष्पंजय कुमार, राधा देवी, राधा देवी की पुत्री सुलेखा देवी, छोटी उर्फ अर्पिता एवं टिशू कुमार भी शामिल हैं.
क्या थी घटना
गौरतलब है कि नालंदा जिले के रहुई थाने के सुल्तानपुर की 15 वर्षीय नाबालिग लड़की ने नालंदा के महिला थाने में 9 फरवरी को रेप की शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़िता ने आरोप लगाया था कि छह फरवरी को बिहारशरीफ के धनेश्वर घाट मोहल्ले की सुलेखा देवी उसे एक जन्मदिन की पार्टी में ले जाने के बहाने गिरियक ले गईं.
मुंह बंद रखने की धमकी
आरोप है कि सुलेखा ने नाबालिग को नवादा के विधायक राजबल्लभ के हवाले कर दिया. विधायक ने उसके साथ रेप किया. लड़की को सात फरवरी को बिहारशरीफ में उसके घर छोड़ दिया गया और उसे मुंह बंद रखने की धमकी दी गई. थाने में मामला दर्ज होने के बाद से विधायक राजबल्लभ यादव फरार हो गए थे. एक महीने के बाद सरेंडर किया था.
सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था
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